Skip to main content
Nifty टारगेट कट होने से बढ़ी चिंता, क्या बाजार की वापसी मुश्किल

Nifty टारगेट कट होने से बढ़ी चिंता, क्या बाजार की वापसी मुश्किल?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब केवल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय शेयर बाजार के आउटलुक पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की तेजी के बीच कई बड़े ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने भारत के इक्विटी मार्केट को लेकर अपने अनुमान में बदलाव किया है। इसी वजह से Nifty के टारगेट में कटौती की गई है, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है। हालांकि, कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जिनमें अब भी मजबूती की उम्मीद जताई जा रही है।

Nomura और Citi ने घटाए Nifty के लक्ष्य

ग्लोबल ब्रोकरेज Nomura और Citi ने मौजूदा हालात को देखते हुए Nifty के अपने टारगेट कम कर दिए हैं।
Nomura ने दिसंबर 2026 के लिए Nifty का लक्ष्य 29,300 से घटाकर 24,900 कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार की तेजी सीमित रह सकती है।

वहीं Citi ने भी अपने अनुमान में कटौती करते हुए Nifty का टारगेट 28,500 से घटाकर 27,000 कर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के चलते ब्रोकरेज हाउस भारतीय बाजार को लेकर फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

Morgan Stanley ने भी भारत को किया डाउनग्रेड

इससे पहले ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक Morgan Stanley ने भी भारतीय बाजार की रेटिंग में बदलाव किया था।
ब्रोकरेज ने भारत को Overweight से घटाकर Equal weight कर दिया है। इसका मतलब है कि अब अपने ग्लोबल पोर्टफोलियो में भारत को पहले जितना अधिक वेटेज देने के पक्ष में ब्रोकरेज नहीं है।

Nomura की चेतावनी: और गिर सकता है बाजार

Nomura के मुताबिक यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
ब्रोकरेज ने अपने बेयर केस में Nifty का लक्ष्य 21,000 तक बताया है।

Nomura का कहना है कि:

  • कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से FY27 की कॉरपोरेट कमाई पर 10–15% तक का दबाव आ सकता है।
  • निकट अवधि में बाजार में करीब 5% और करेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • फिलहाल मिडिल ईस्ट में तनाव जल्दी खत्म होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।

कच्चे तेल की कीमतें क्यों बनीं सबसे बड़ा खतरा

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, LPG और प्राकृतिक गैस के आयात से पूरा करता है।

Nomura के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इसका प्रभाव संभाल सकती हैं।
लेकिन अगर कीमत इससे ज्यादा बढ़ती है, तो इसका बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। इससे महंगाई बढ़ने और मांग कमजोर पड़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

 

आज की बड़ी खबर: बैंकों के शेयरों में भयंकर गिरावट

 

घरेलू निवेशकों की खरीदारी भी हुई धीमी

हाल के समय में भारतीय बाजार को सहारा देने में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की बड़ी भूमिका रही है। लेकिन अब ब्रोकरेज का कहना है कि घरेलू फंड्स की खरीदारी की रफ्तार भी थोड़ी धीमी पड़ती नजर आ रही है। इससे बाजार की मजबूती पर असर पड़ सकता है।

Citi का सेक्टर आउटलुक

Citi ने अपने सेक्टर आउटलुक में भी बदलाव किया है।
ब्रोकरेज ने ऑटो सेक्टर को Overweight से घटाकर Neutral कर दिया है। इसकी वजह तेल और गैस की बढ़ती कीमतें बताई गई हैं, जिससे लागत बढ़ सकती है और मांग पर असर पड़ सकता है।

हालांकि Citi को अभी भी कुछ सेक्टरों में मजबूत संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

Citi के पसंदीदा सेक्टर:

  • बैंकिंग
  • हेल्थकेयर
  • टेलीकॉम
  • डिफेंस

कम पसंदीदा सेक्टर:

  • IT सर्विसेज
  • मेटल
  • कंज्यूमर स्टेपल्स

निवेशकों के लिए क्या है संकेत

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी के फैसले लेने से बचना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, इसलिए निवेशकों को मजबूत बैलेंस शीट, स्थिर कमाई और कमोडिटी कीमतों से कम प्रभावित होने वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार की गिरावट गुणवत्तापूर्ण शेयरों में धीरे-धीरे निवेश करने का अवसर भी बन सकती है।

FAQ

 

ब्रोकरेज ने Nifty के टारगेट क्यों घटाए हैं?


मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता के कारण ब्रोकरेज हाउस ने बाजार के आउटलुक में कटौती की है।

 

Nomura का नया Nifty टारगेट क्या है?


Nomura ने दिसंबर 2026 के लिए Nifty का टारगेट 29,300 से घटाकर 24,900 कर दिया है।

 

Citi किन सेक्टरों को पसंद कर रहा है?


Citi के मुताबिक बैंकिंग, हेल्थकेयर, टेलीकॉम और डिफेंस सेक्टर में बेहतर अवसर मौजूद हैं।

 

कच्चे तेल की कीमतें बाजार को कैसे प्रभावित करती हैं?


तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है, महंगाई बढ़ती है और कंपनियों की लागत बढ़ने से मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

 

निवेशकों को मौजूदा स्थिति में क्या करना चाहिए?


निवेशकों को मजबूत कंपनियों में निवेश करना चाहिए, पोर्टफोलियो को विविध रखना चाहिए और गिरावट के दौरान चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। 

 

इस विश्लेषण का स्रोत Tredixo है।

Add new comment

Restricted HTML

  • You can align images (data-align="center"), but also videos, blockquotes, and so on.
  • You can caption images (data-caption="Text"), but also videos, blockquotes, and so on.

About the Author

 

About Gaurav Goel 

I have 24 years of overall experience and more than 23 years in Wealth Management industry across India and Singapore. Over this period, I have dealt with large number of High Net Worth clients and successfully managed their investment portfolios through various investment cycles. 

After working with some of the leading banks and institutions for almost 2 decades, I now work on my own as an entrepreneur and a SEBI registered investment advisor since 2020.

I focus primarily on Portfolio over Products & Customer over Commissions. The belief in following the process and avoiding unnecessary noise in investing differentiate me from other wealth advisers.

I strongly believe in core investment philosophy of fundamental investing and long-term wealth creation. Anyone looking for quick money-making ideas will not find resonance with my art of investing. I view opportunities in market corrections and follow a method in madness approach to investing.

My hobbies include sports, astronomy, reading and travelling. Most importantly I am passionate about my work and the world of investing.
 
 
 
 
 
 
We are professional and reliable provider since we offer customers the most powerful and beautiful themes. Besides, we always catch the latest technology and adapt to follow world’s new trends to deliver the best themes to the market.

Contact info

We are the leaders in the building industries and factories. We're word wide. We never give up on the challenges.

Recent Posts